AIBE 20 Set C Question Paper PDF 2025 solution in Hindi Download PDF – Booklet Code C
AIBE 20 Question Paper Solution with detailed explanation 2025 – Booklet Code C
AIBE 20 Question Paper Solution – Booklet Code C
AIBE 20 QUESTION PAPER – 30 November 2025: #AIBE 20 Question Paper Solution जो हम यहां प्रसिद्ध कर रहे हैं इस के लिए हम अहमदाबाद , गुजरात के कानूनी सलाहकार विशेषज्ञ श्रीमान राजन साहब के आभारी हैं। ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE 20) 2025 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 30 नवंबर, 2025 को देश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक आयोजित किया । आज यह परीक्षा सम्पन्न होते ही सभी उमीदवार सोच र होंगे की वो पास हो पाएंगे की नहीं, तो इस लिए यहां हम AIBE 20 (AIBE XX) Question Paper Solution 2025 का पेपर सोल्यूशं दे रहे हैं। एक ही शिफ्ट में दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक इस परीक्षा को 30 November 2025 को आयोजित किया गया था। AIBE 20 Question Paper 2025 with Solutions
New: AIBE 20 Question Paper 2025 with Answer Key and Detailed Solutions
बार काउंसिल ऑफ इंडिया उन लॉ ग्रेजुएट्स के लिए AIBE आयोजित करता है जो भारत में वकील के तौर पर काम करने के लिए अपना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस लेना चाहते हैं। CERTIFICATE OF PRACTICE पाने और भारतीय अदालतों में वकालत शुरू करने के लिए यह एग्जाम सनद प्राप्त कारण के बाद दो साल में पास करना ज़रूरी है।
AIBE 20 Question Papers with Answer Key: SET A | SET C | Set D
AIBE 20 Question Paper 2025 with Answer Key
BOOKLET CODE C
- निम्नलिखित प्रश्न में, एक कथन के बाद दो निष्कर्ष, I और II दिए गए हैं।
कथन : बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार, उपयुक्त सरकार प्रत्येक बच्चे या किशोर के लिए बाल एवं किशोर श्रम पुनर्वास कोष में ₹ 15,000 जमा करती है, जिसके लिए नियोक्ता से जुर्माने की राशि जमा की गई है। कोष में राशि बैंकों में जमा या निवेश की जाती है, और अर्जित ब्याज भी बच्चा या किशोर को देय होता है।
I. बच्चा या किशोर न केवल जमा की गई राशि का, बल्कि उस पर अर्जित ब्याज का भी हकदार है।
II. सरकार को नियोक्ता से जुर्माने के रूप में ली गई राशि के अलावा कोई अन्य धनराशि जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
उपर्युक्त कथन और निष्कर्षों के संदर्भ में,निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?
(A) केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है।
(B) केवल निष्कर्ष II अनुसरण करता है।
(C) दोनों निष्कर्ष I और II अनुसरण करते हैं।
(D) न तो निष्कर्ष I और न ही II अनुसरण करता है।
सही विकल्प: A : केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है
बच्चा या किशोर न केवल जमा की गई राशि का, बल्कि उस पर अर्जित ब्याज का भी हकदार है।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारतीय न्याय संहिता, 2023, सामूहिक बलात्कार के कुछ रूपों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान करती है।
कारण (R) : इस प्रावधान का उद्देश्य सभी यौन अपराधों को गैर-जमानती बनाना है।
उपर्युक्त दो कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं,और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
(D) (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
सही विकल्प: (C): A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
प्रावधान का उद्देश्य सजा की मात्रा बढ़ाना है, न कि सभी यौन अपराधों को गैर-जमानती बनाना।
वैसे भी, BNS में सभी यौन अपराध गैर-जमानती नहीं हैं (जैसे अश्लील अभद्रता जमानती है)।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत, यदि घोषित व्यक्तिघोषणा में निर्दिष्ट समय के भीतर उपस्थित
होता है, तो न्यायालय कुर्क की गई संपत्ति को मुक्त कर देगा।
कारण (R) :भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत संपत्ति की कुर्की का उद्देश्य उद्घोषित व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष
उपस्थित होने के लिए बाध्य करना है, न कि उसे उसकी संपत्ति से स्थायी रूप से वंचित करना।
उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
(D) (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
सही विकल्प: (A) : (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- दिए गए कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें।
दो कंपनियों के बीच उनके मध्यस्थता खंड के प्रवर्तन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है।
निम्नलिखित कथनों की जाँच कीजिए :
कथन 1 : एक मध्यस्थता समझौता लिखित रूप में होना चाहिए, और यह किसी अनुबंध,पत्रों के आदान-प्रदान, टेलेक्स, टेलीग्राम या इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से हो सकता है।
कथन 2: एक मध्यस्थता समझौता बिना किसी लिखित रिकॉर्ड के, केवल पक्षों के आचरण से ही निहित हो सकता है।
(A) केवल कथन 1 सत्य है।
(B) केवल कथन 2 सत्य है
(C) कथन 1 और 2 दोनों सत्य हैं
(D) न तो कथन 1 और न ही 2 सत्य है
कथन 1 सही है — लिखित रूप में होना आवश्यक है, और यह अनुबंध, पत्र-व्यवहार, टेलेक्स, टेलीग्राम या इलेक्ट्रॉनिक संचार से हो सकता है।
कथन 2 सही नहीं है — केवल आचरण से निहित समझौता मान्य नहीं है, जब तक कि वह धारा 7(4) के तहत लिखित में न माना जाए (यानी लिखित में आपत्ति न करना)।
इसलिए सही उत्तर है:
(A) केवल कथन 1 सत्य है।
- निम्नलिखित प्रश्न में, एक कथन के बाददो निष्कर्ष, I और II दिए गए हैं।
कथन : अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के अनुसार,जब किसी राज्य बार काउंसिल का कार्यकाल बिना चुनाव के समाप्त हो जाता है,तो बार
काउंसिल ऑफ इंडिया एक विशेष समिति का गठन करेगी, जिसमें राज्य बार काउंसिल का पदेन सदस्य अध्यक्ष और दो मनोनीत
सदस्य होंगे। विशेष समिति को नई काउंसिल के गठन तक राज्य बार काउंसिल के सभी कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार है,
और चुनाव छह महीने के भीतर होने चाहिए, जब तक कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अवधि बढ़ाई न जाए।
निष्कर्ष:
I. विशेष समिति को राज्य बार काउंसिल के लंबित अनुशासनात्मक मामलों को संभालने का अधिकार है।
II. बार काउंसिल ऑफ इंडिया, दर्ज कारणों से, राज्य बार काउंसिल के चुनाव कराने के लिए छह महीने की अवधि बढ़ा सकती
है।
उपर्युक्त कथन और निष्कर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
(A) केवल निष्कर्ष अनुसरण करता है
(B) केवल निष्कर्ष II अनुसरण करता है
(C) निष्कर्ष I और IIदोनों अनुसरण करते हैं
(D) न तो निष्कर्ष 1और न ही II अनुसरण करता है
दोनों निष्कर्ष कथन से तार्किक रूप से निकलते हैं।
सही विकल्प: (C) निष्कर्ष I और II दोनों अनुसरण करते हैं।
- दिए गए कथनों को पढ़िए और सही विकल्प चुनिए ।
कथन 1 :आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत, गृह संपत्ति से आय की गणना करते समय वार्षिक मूल्य के 30% के बराबर
कटौती की अनुमति है।
कथन 2 : जहाँ संपत्ति उधार ली गई पूँजी से अर्जित या निर्मित की गई है, ऐसी पूँजी पर देय ब्याज के लिए अधिकतम कटौती कुछ
शर्तों के अधीन ₹ 2,00,000 तक सीमित है।
(A) कथन 1 और 2 दोनों असत्य हैं.
(C) केवल कथन 2 सत्य है
(B) केवल कथन 1 सत्य है
(D) दोनों कथन सत्य हैं
सही विकल्प: (D) दोनों कथन सत्य हैं।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अंतर्गत, मिताक्षरा कानून द्वारा शासित संयुक्त हिंदू परिवार में पुत्री,पुत्र
की भांति जन्म से ही अपने अधिकार से सहदायिक हो जाती है।
कारण (R) : यह प्रावधान पुत्रियों को सहदायिक संपत्ति में पुत्रों के समान अधिकार,दायित्व और निर्योग्यताएँ प्रदान करता है।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अंतर्गत उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में,निम्नलिखित में से कौन सासही है ?
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A)सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
(D) (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
इस में सही विकल्प नहीं दिया गया है।
2005 से पहले 1956 अधिनियम में पुत्री सहदायिक नहीं थी :
(A) गलत।
(R) में जो विवरण है वह 2005 के संशोधन वाला है, जो 1956 अधिनियम का ही संशोधित रूप है, इसलिए (R) सही है।
इस आधार पर D सही उत्तर होगा।
सही विकल्प: (D)
- भारतीय संविदा अधिनियम,1872 के अनुसार, स्वीकृति पूर्ण और बिना शर्त होनी चाहिए।यदि प्रस्ताव के प्रति प्रस्ताव प्राप्तकर्ता
की प्रतिक्रिया में कोई नया नियम शामिल हो जाए, तो इसका विधिक प्रभाव क्या होगा ?
(A) यह एक वैध स्वीकृति बन जाती है, और नया नियम केवल एक सुझाव के रूप में शामिल होजाता है।
(B) यदि नया नियम कोई भीतिक परिवर्तननहीं है,तो यह एक वैध स्वीकृति के रूपमें कार्य करता है।
(C) यह एक प्रति-प्रस्ताव का गठन करता है, जिससे मूल प्रस्ताव अस्वीकृत हो जाता है।
(D) यह मूल प्रस्ताव को तब तक के लिए स्थगित कर देता है जब तक कि प्रस्तावक द्वारा नया नियम स्वीकृत या अस्वीकृत नहीं कर दिया जाता ।
यदि प्रस्ताव प्राप्तकर्ता स्वीकृति देते समय कोई नया नियम या शर्त जोड़ता है, तो वह स्वीकृति नहीं, बल्कि प्रति-प्रस्ताव (counter-offer) मानी जाती है।
प्रति-प्रस्ताव, मूल प्रस्ताव को स्वतः अस्वीकृत कर देता है (धारा 7 के सिद्धांत के अनुसार)।
इसलिए सही विकल्प है: (C) यह एक प्रति-प्रस्ताव का गठन करता है, जिससे मूल प्रस्ताव अस्वीकृत हो जाता है।
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 उन विशिष्ट परिस्थितियों का प्रावधान करता है जहाँ बिना प्रतिफल के किया गया समझौता शून्य
नहीं होता। निम्नलिखित में से कौन-सा समझौता नए प्रतिफल के अभाव में भी वैध है ?
(A) ‘A’ द्वारा ‘B’ को पिछले महीने ‘A’ को स्वेच्छा से दी गई सेवा के लिए ₹ 5000 देने का मौखिक वादा ।
(B) पति द्वारा स्वाभाविक प्रेम और स्नेह के कारण अपनी पत्नी को संपत्ति हस्तांतरित करने का लिखित और पंजीकृत वादा ।
(C) किसी सार्वजनिक धर्मार्थ निधि में ₹ 1 लाख दान करने का वादा
(D) किसी नाबालिग द्वारा वयस्क होने पर अपनी अल्पवयस्कता के दौरान लिए गए ऋण को चुकाने का वादा
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 25 में कुछ अपवाद दिए गए हैं जहाँ बिना प्रतिफल के समझौता भी वैध होता है।
धारा 25(1) – पिछले स्वैच्छिक सेवा के लिए वादा → वैध है यदि लिखित और पंजीकृत है। (A) मौखिक है, इसलिए वैध नहीं।
धारा 25(2) – स्वाभाविक प्रेम और स्नेह से किया गया वादा → वैध है यदि लिखित और पंजीकृत है। (B) में यह शर्त पूरी होती है।
धारा 25(3) – पिछले समय-बारित ऋण का वादा → वैध नहीं, क्योंकि अल्पवयस्क का अनुबंध शून्य होता है। (D) वैध नहीं।
धारा 25(4) – सार्वजनिक उद्देश्य के लिए दान का वादा → वैध है, भले ही लिखित न हो, परंतु वादे का पालन करना आवश्यक है। (C) भी वैध है।
सही विकल्प: (B): पति द्वारा स्वाभाविक प्रेम और स्नेह के कारण अपनी पत्नी को संपत्ति हस्तांतरित करने का लिखित और पंजीकृत वादा ।
- प्रत्यायोजित विधान के संदर्भ में,वह न्यायिक सिद्धांत जो विधायिका को प्रशासन पर “अनियंत्रित विधायी शक्ति” प्रदान करने से
रोकता है, उसे किस सिद्धांत के रूप में जाना जाता है :
(A) अधिकार-बाह्य (अधिकारातीत)
(B) अत्यधिक प्रत्यायोजन
(C) सशर्त विधान
(D) शक्तियों का पृथक्करण
न्यायिक सिद्धांत जो विधायिका को अनियंत्रित विधायी शक्ति (uncontrolled legislative power) प्रदान करने से रोकता है, अत्यधिक प्रत्यायोजन का सिद्धांत (Doctrine of Excessive Delegation) कहलाता है।
यह सिद्धांत कहता है कि विधायिका आवश्यक नीतिगत मामलों को छोड़कर अपनी अनिवार्य विधायी कार्य प्रशासन को नहीं सौंप सकती।
इसलिए सही विकल्प है: (B) अत्यधिक प्रत्यायोजन
- हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत विवाह को अमान्य करने केलिए इस आधार पर याचिका दायर की जाती है कि सहमतिधोखाधड़ी से प्राप्त की गई थी, तो डिक्री प्रदान करने में वैधानिक बाधाक्या है ?
(A) धोखाधड़ी का पता चलने के छह महीने से अधिक समय बाद याचिका दायर की गई थी।
(B) धोखाधड़ी का पता चलने के बाद से याचिकाकर्ता प्रत्यर्थी के साथ पति-पत्नी के रूप में रह रहा है।
(C) धोखाधड़ी प्रत्यर्थी के परिवार की सामाजिक स्थिति से संबंधित है।
(D) दोनों पक्षों ने परामर्श केंद्र के माध्यम से सुलह का प्रयास नहीं किया है।
(A) ग़लत है क्योंकि समय सीमा 1 वर्ष है, 6 महीने नहीं।
(B) सही है — यदि याचिकाकर्ता धोखाधड़ी का पता चलने के बाद भी प्रत्यर्थी के साथ पति-पत्नी के रूप में रह रहा है, तो डिक्री नहीं दी जाएगी।
(C) और (D) इस आधार पर वैधानिक बाधा नहीं हैं।
सही उत्तर: (B): धोखाधड़ी का पता चलने के बाद से याचिकाकर्ता प्रत्यर्थी के साथ पति-पत्नी के रूप में रह रहा है।
- पक्षकारों के बीच किसी समझौते के अभाव में, माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 21 के अंतर्गत मध्यस्थता
कार्यवाही निम्नलिखित तिथि से प्रारंभ मानी जाएगी।
(A) मध्यस्थ की नियुक्ति की तिथि पर ।
(B) मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर की तिथि पर ।
(C) प्रत्यर्थी द्वारा मध्यस्थता हेतु अनुरोध प्राप्त होने की तिथि पर ।
(D) माध्यस्थम् अधिकरण द्वारा नोटिस जारी करने की तिथिपर ।
माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 21 के अनुसार, पक्षकारों द्वारा अन्यथा कुछ तय न किए जाने पर, मध्यस्थता कार्यवाही उस तिथि से आरंभ मानी जाएगी जब प्रत्यर्थी को मध्यस्थता हेतु अनुरोध प्राप्त होता है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) प्रत्यर्थी द्वारा मध्यस्थता हेतु अनुरोध प्राप्त होने की तिथि पर।
- निम्नलिखित में से किस जनहित याचिका ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का विस्तार करके प्रदूषण मुक्तजल और वायु के आनंद के अधिकार को इसमें शामिल किया ?
(A) सुभाष कुमार बनाम बिहारराज्य, (1991) 1 एससीसी 598
(B) नीलाबती बेहरा बनाम उड़ीसा राज्य, (1993) 2एससीसी 746
(C) शीला बरसे बनाम भारत संघ, (1986) 3एससीसी 596
(D) ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम, (1985) 3 एससीसी 545
सही उत्तर है: (A) सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, (1991) 1 SCC 598
विश्लेषण और कारण:
सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य (1991) केस में सुप्रीम-court ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदूषण-मुक्त जल और वायु प्राप्त करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का अभिन्न अंग है।
- किस जनहित याचिका मामले के परिणामस्वरूप भारत के सर्वोच्चन्यायालय ने ‘पूर्ण दायित्व’ का सिद्धांत निर्धारित किया ? 15.
(A) एम.सी.मेहता बनाम भारत संघ, एआईआर 1987 एससी 1086
(B) एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ, 1988 एससीआर (2) 530
(C) एम.सी.मेहता बनाम कमल नाथ, (1997) 1 एससीसी 388
(D) एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ, एआईआर 1997 एससी 734
सही उत्तर है: (A) एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ, एआईआर 1987 एससी 1086
(यह ओलियम गैस लीक केस (Oleum Gas Leak Case) के नाम से प्रसिद्ध है)
- निम्नलिखित में से किस मामले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि नेमो जुडेक्स इन कॉसा सुआ का नियम आवश्यकता के सिद्धांत के अधीन है ?
(A) साहनी सिल्क मिल्स (प्रा.) लिमिटेड बनाम कर्मचारी राज्य बीमा निगम, (1994) 5 एससीसी 346
(B) इन रे: दिल्ली कानून अधिनियम, एआईआर 1951 एससी 332
(C) जे. महापात्रा एंड कंपनी बनाम उड़ीसा राज्य, (1984) 4 एससीसी 103
(D) भारत संघ बनाम जी.गणयुथम, (1997) 7 एससीसी 463
सही उत्तर है: (C) जे. महापात्रा एंड कंपनी बनाम उड़ीसा राज्य, (1984) 4 एससीसी 103
वजह और स्पष्टीकरण:
इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट (न्यायमूर्ति ओ. चिन्नप्पा रेड्डी की पीठ) ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्राकृतिक न्याय का प्रसिद्ध सिद्धांत “नेमो जुडेक्स इन कॉसा सुआ” (कोई व्यक्ति अपनी ही मुकदमे में न्यायाधीश नहीं हो सकता) पूर्णतः कठोर नहीं है, बल्कि यह “आवश्यकता के सिद्धांत” (Doctrine of Necessity) के अधीन है।
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 11 के अनुसार, किसी अनुवर्ती वाद पर रेस ज्युडिकेटा (पूर्व-न्याय) लागू होने के लिए, पूर्ववर्तीवाद
I. अंतिमरूप से निर्णीत हो चुका होना चाहिए।
II. केवल अनुवर्ती वाद से पहले संस्थित किया जा सकता है।
III. अनुवर्ती वाद में सीधे और मूलतः उसी मामले से संबंधित होना चाहिए।
IV. उन्हीं पक्षों के बीच होना चाहिए, या उन पक्षों के बीच होना चाहिए जिनके अधीन वे या उनमें से कोई दावा करता है।
सही उत्तर चुनें।
(A) I, II और III
(B) II, III और IV
(C) I, III और IV
(D) I, II, III और IV
सही विकल्प: (C) I, III और IV
क्यों की विकल्प II — “पूर्ववर्ती वाद केवल अनुवर्ती वाद से पहले संस्थित किया जा सकता है” — यह तो स्वाभाविक है, लेकिन धारा 11 में इसे स्पष्ट रूप से शर्त के रूप में नहीं गिना गया है।
प्रश्न में दिए गए कथनों के आधार पर I, III, IV सही हैं।
17 . जहाँ डिक्री धन के भुगतान के लिए है, वहाँ कारावास द्वारा निष्पादन का आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक ऋणी को कारण बताने का अवसर देने के बाद, न्यायालय इस बात से संतुष्ट न हो जाए कि
I. निर्णीत ऋणी के फरार होने या न्यायालय के अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाओं को छोड़ने की संभावना है।
II. निर्णीत ऋणी ने, उस वाद के संस्थित होने से पहले जिसमें डिक्री पारित की गई थी, अपनी संपत्ति का कोई भाग बेईमानी से
हस्तांतरित कर दिया है।
ΠΙ. डिक्री उस राशि के लिए है जिसके लिए निर्णीत ऋणी न्यासीय हैसियत से हिसाब देने के लिए बाध्य था।
IV. निर्णांत ऋणी के पास, डिक्री की तिथि से, डिक्री की पर्याप्त राशि का भुगतान करने के साधन हैं। थे और उसने उसे भुगतान
करने में उपेक्षा की है।
सही उत्तर चुनें।
(A) I,II और III
(B) II, III और IV
(C) I, III और IV
(D) I, II, III और IV
सही उत्तर है: (B) II, III और IV
व्याख्या: यह प्रश्न सीपीसी की धारा 51(c) तथा ऑर्डर 21 नियम 37 और 38 के अंतर्गत धन डिक्री (money decree) के निष्पादन के लिए निर्णीत ऋणी (Judgment Debtor) को सिविल जेल भेजने की शर्तों से संबंधित है।
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अनुसार, प्रतिवादीके विरुद्ध एकपक्षीय डिक्री को अपास्त किया जा सकता है
- यदि वह न्यायालय को संतुष्ट कर दे कि समन की तामील विधिवत नहीं की गई थी।
II. यदि वह न्यायालय को संतुष्ट कर दे कि वाद की सुनवाई के समय उसे किसी पर्याप्त कारण से उपस्थित होने से रोका गया था।
III. यदि वह न्यायालय को संतुष्ट कर दे कि समन की तामील में अनियमितता हुई है, जबकि प्रतिवादी को सुनवाई की तारीख की सूचना थी और उसके पास उपस्थित होकर वादी के दावे का उत्तर देने के लिए पर्याप्त समय था।
IV. विरोधी पक्ष को सूचना तामील किएबिना ।
सही उत्तर चुनें।
(A) I और II
(B) I, II और III
(C) I और IV
(D) I, II, III और IV
सही उत्तर है: (A) I और II
व्याख्या (सीपीसी ऑर्डर 9 नियम 13 के अनुसार):
एकपक्षीय डिक्री (ex-parte decree) को अपास्त (set aside) करने के लिए प्रतिवादी को न्यायालय को संतुष्ट करना होता है कि निम्न में से कोई एक आधार मौजूद था:
समन की तामील विधिवत नहीं हुई थी (summons not duly served), अथवा वह किसी पर्याप्त कारण (sufficient cause) से सुनवाई की तारीख को उपस्थित होने से रोका गया था।
- पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया संस्वीकृति बयान भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत कब
स्वीकार्य होगा ?
(A) केवल तभी जब यह स्वेच्छा से लिखित रूप में दिया गया हो
(B) केवल तभी जब यह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में दिया गया हो
(C) केवल तभी जब यह दो स्वतंत्र गवाहों द्वारा समर्थित हो
(D) केवल तभी जब यह आरोप पत्र दाखिल होने के बाद दर्ज किया गया हो
वैसे पुलिस हिरासत में दिया गया कोई भी “संस्वीकृति बयान” (confession) स्वयं में स्वीकार्य नहीं होता, चाहे वह लिखित हो, मजिस्ट्रेट के सामने हो या गवाहों के सामने हो।
लेकिन अगर हिरासत में नहीं हो और केवल पुलिस स्टेशन में हों तो विकल्प (B) केवल तभी जब यह मजिस्ट्रेट की तत्काल उपस्थिति में दिया गया हो यह सही विकल्प होगा।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की कौन-सी धारा विशेषज्ञों की राय से संबंधित है ?
(A) धारा 38
(B) धारा 39
(C) धारा 36
(D) धारा 46
सही उत्तर है: (B) धारा 39
व्याख्या (भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में नया प्रावधान):
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (जो 1 जुलाई 2024 से लागू हो चुका है) में विशेषज्ञों की राय (Opinion of Experts) से संबंधित प्रावधान धारा 39 में दिया गया है।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ?
(A) A, B के साथ कुछ शर्तों पर नील की आपूर्ति के लिए लिखित अनुबंध करता है। अनुबंध में इस तथ्य का उल्लेख है कि B
ने किसी अन्य अवसर पर, मौखिक रूप से, अनुबंधित अन्य नील की कीमत Aको चुकाई थी। मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किया
जाता है कि अन्य नील के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया था। साक्ष्य स्वीकार्य है।
(B) A, 1 मार्च, 2023 को B को एक हज़ार रुपये देने के लिए लिखित रूप से पूर्णतः सहमत होता है। यह तथ्य कि उसी समय,
एक मौखिक समझौता किया गया था कि 31 मार्च, 2023 तक धनराशि का भुगतान नहीं किया जाएगा, सिद्ध किया जा सकता है।
(C) A, B की संपत्ति, कुछ खदानों पर कुछ शर्तों पर काम करने के लिए B के साथ एक लिखित अनुबंध करता है। B द्वारा उनके
मूल्य के बारे में गलत जानकारी दिए जाने के कारण Aको ऐसा करने के लिए प्रेरित किया गया थाथ। इस तथ्य को सिद्ध किया
जंक जा सकता है। र
(D) A, B से माल मँगवाने के लिए एक पत्र भेजता है जिसमें भुगतान के समय के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, और माल की
सुपुर्दगी पर उसे स्वीकार कर लेता है। B, A पर कीमत के लिएवाद दायर करता है। A यह दर्शित कर सकता है कि माल
उधार पर उस अवधि के लिए दिया गया था जो अभी समाप्तनहीं हुईहै।
सही उत्तर है: (B) गलत कथन है।
कारण : (भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 90, 91 और 92 के आधार पर):
नया भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 भी पुराने 1872 अधिनियम की धारा 91 और 92 के सिद्धांत को लगभग जस-का-तस रखता है (नई धारा 90, 91 और विशेष रूप से धारा 92 में)।
धारा 92 का Proviso (2) के अनुसार मौखिक साक्ष्य तभी स्वीकार्य है जब वह लिखित अनुबंध की शर्तों की वैधता (validity) को चुनौती देता हो (जैसे धोखा, भय, अवैधता आदि)।
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार, दो व्यक्तियों को “प्रतिषिद्ध नातेदारी की डिग्रियाँ” में माना जाता है यदि :
I. एक उनमें से दूसरे का पारंपरिक पूर्वपुरुष हो, जिसमें दत्तक नातेदारी भी शामिल है।
II. एक उनमें से दूसरे के पारंपरिक पूर्वपुरुष या वंशज की पत्नी या पति रहा हो,जिसमें अर्ध या एकोदर रक्त के साथ-साथ पूर्णरक्त की नातेदारी भी शामिल है।
III. यदि एक उनमें से दूसरे के भाई की या पिता अथवा माता के भाई की, या पितामह अथवा पितामही के भाई कीया मातामह
अथवा मातामही के भाई की पत्नी रही हो।
IV. यदि वे भाई और बहन, ताया,चाचा और भतीजी, मामा औरभांजी, फूफी और भतीजा, मौसी और भांजा या भाई-बहन के
आपत्य, भाई-भाई के आपत्य अथवा बहन-बहनके आपत्य हों।
सहीउत्तर चुनें।
(A) I, III और IV
(B) III और IV
(C) II, III और IV
(D) I, II, III और IV
सही उत्तर है: (C) II, III और IV
व्याख्या : (हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 3(g) के साथ पढ़ी गई धारा 11 तथा अनुसूची के आधार पर सही उत्तर C है ।
- भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार के लिए प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य
निर्धारित करता है ?
(A) अनुच्छेद 48A
(C) अनुच्छेद 51A(g)
(B) अनुच्छेद 39 A
(D) अनुच्छेद 51A (h)
भारतीय संविधान में प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का कर्तव्य अनुच्छेद 51A(g) में निर्धारित है।
इसलिए सही विकल्प है : (C) अनुच्छेद 51A(g)
- मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 की धारा 2 के अंतर्गत विवाह विघटन कीडिक्री के आधार हैं :
I. पति का ठौर ठिकाना दो वर्षों से ज्ञात नहीं है।
II. पति को पाँच वर्ष की अवधि के लिए कारावास का दण्ड दिया गया है।
III.पति दो वर्षों की अवधि के लिए, बिना समुचित कारण के, अपने वैवाहिक कर्तव्यों का पालन करने में असफल रहा है।
IV. पति ने एक वर्ष की अवधि के लिए उसकी पत्नी के भरण-पोषण की उपेक्षा की है या उसे प्रदान करने में असफल रहा है।
सही उत्तर चुनें।
(A) III और IV
(B) I और I
(C) I, II III और IV
(D) इनमें से कोई नहीं
दिए गए सभी कथनों में अवधि गलत है, इसलिए सही उत्तर है: (D) इनमें से कोई नहीं
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अनुसार, किसी विशेष इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (अभिलेख) के संबंध में “मध्यवर्ती” से ऐसा
व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी अन्य व्यक्तिकी ओर से उस रिकॉर्ड (अभिलेख) को प्राप्त करता है, भंडारित करता है या पारेषित करता
है या उस रिकॉर्ड (अभिलेख) के संबंध में कोई सेवा प्रदान करता है और उसके अंतर्गत शामिल हैं:
I. दूरसंचार सेवा प्रदाता ।
II. सर्च इंजन ।
III. साइबर कैफे ।
IV. ऑनलाइन नीलामी (ऑक्शन) साइटें ।
सही उत्तर चुनें।
(A) I और IV
(B) I और II
(C) I,II और IV
(D) I, II, III और IV
निष्कर्ष: सभी चारों ही “मध्यवर्ती” की परिभाषा में आते हैं।
सही उत्तर: (D) I, II, III और IV
- माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन-सा आदेश अपील योग्य नहीं है?
(A) धारा 8 के अधीन पक्षों को मध्यस्थता के लिए निर्दिष्ट करने से इंकार करना।
(B) धारा 11 के अंतर्गत मध्यस्थ नियुक्त करने से इंकार करना।
(C) धारा 9 के अंतर्गत कोई उपाय को मंजूर करने से इंकार करना।
(D) धारा 17 के अंतर्गत अंतरिम उपाय को मंजूर करने से इंकार करना।
धारा 37(1)(a) के अनुसार, धारा 9 के अंतर्गत अंतरिम उपाय मंजूर करने या न करने का आदेश अपील योग्य नहीं है।
इसलिए सही उत्तर है: (C) धारा 9 के अंतर्गत कोई उपाय को मंजूर करने से इंकार करना।
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 9A के अंतर्गत, बार काउंसिल द्वारा गठित विधिक सहायता समिति में निम्नलिखित सदस्य
होंगे :
(A) तेरह से अधिक नहीं परंतु नौ से कम नहीं ।
(B) ग्यारह से अधिक नहीं परंतु सात से कम नहीं।
(C) नौ से अधिक नहीं परंतु पाँच से कम नहीं।
(D) सात से अधिक नहीं परंतु तीन से कम नहीं ।
अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 9A के अनुसार, बार काउंसिल द्वारा गठित विधिक सहायता समिति के सदस्यों की संख्या नौ से अधिक नहीं परंतु पाँच से कम नहीं होगी।
इसलिए सही विकल्प है: (C) नौ से अधिक नहीं परंतु पाँच से कम नहीं।
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की कौन सी धारा भारतीय बार काउंसिल की अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रावधान करती है ?
(A) धारा 35
(B) धारा 36
(C) धारा 37
(D) धारा 38
सही उत्तर है: (A) धारा 35
व्याख्या: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 में अधिवक्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा प्रावधान धारा 35 में दिया गया है।
भारतीय बार काउंसिल (BCI) की अनुशासनात्मक शक्ति धारा 36 में है,
लेकिन राज्य बार काउंसिल की मूल अनुशासनात्मक शक्ति धारा 35 में है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 3 (2) के अंतर्गत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद में निम्नलिखित शामिल होंगे :
(A) एक अध्यक्ष और दस अन्य सदस्य, या एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य जो विहित किए जा सकते हैं।
(B) एक अध्यक्ष और पाँच अन्य सदस्य ।
(C) एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य जो विहित किएजा सकते हैं।
(D) एक अध्यक्ष और दस अन्य सदस्य ।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 3(2) के अनुसार, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद का गठन होगा:
“एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य जो विहित किए जा सकते हैं।”
इसका मतलब है कि सदस्यों की संख्या केंद्र सरकार द्वारा नियमों के जरिए तय की जाएगी।
इसलिए सही विकल्प है: (C) एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य जो विहित किए जा सकते हैं।
- निम्नलिखित में से किस मामले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालयने यह माना कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है ?
(A) केरलशिक्षा विधेयक, 1957 के संबंध में, AIR 1958 SC 956
(B) केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य, AIR 1973 SC 1461
(C) बेरुबारी यूनियन एंड एक्सचेंज ऑफ एन्क्लेव्स के संबंध में, AIR 1960 SC 845
(D) मिनर्वा मिल्स लिमिटेड बनाम भारत संघ, AIR 1980 SC 1789
सही उत्तर है: (C) बेरुबारी यूनियन एंड एक्सचेंज ऑफ एन्क्लेव्स के संबंध में, AIR 1960 SC 845
विस्तृत स्पष्टीकरण:
बेरुबारी ओपिनियन केस Berubari Union and Exchange of Enclaves), AIR 1960 SC 845
सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ ने स्पष्ट रूप से माना कि“The Preamble is not a part of the Constitution” और इसे संविधान की व्याख्या के लिए कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं माना जा सकता।
यह भारत में पहला और सबसे स्पष्ट निर्णय था जिसमें प्रस्तावना को संविधान का हिस्सा नहीं माना गया।
- भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संधियों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करने के लिए संसद द्वारा बनाएगए कानूनों की विषय-वस्तु से संबंधित है ?
(A) अनुच्छेद 249
(C) अनुच्छेद 253
(B) अनुच्छेद 251
(D) अनुच्छेद 255
सही उत्तर है: (C) अनुच्छेद 253
व्याख्या : अनुच्छेद 253 : कोई भी संधि, अंतर्राष्ट्रीय समझौता या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का निर्णय लागू करने के लिए संसद को पूरे भारत के लिए कानून बनाने की शक्ति है, चाहे वह विषय राज्य सूची में ही क्यों न हो।
- निम्नलिखित में से किस निर्णय निर्णयों में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ‘निजता के अधिकार’ के मुद्दे पर विचार किया था ?
I. खड़क सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (एआईआर 1963 एससी 1295)
II. पीयूसीएल बनाम भारत संघ (एआईआर 1997 एससी 568) স
III. न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी (सेवानिवृत्त) एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य (2017) 10 एससीसी
IV. एमपी शर्मा बनाम सतीश चंद्र (एआईआर 1954 एससी 300)
(A) II,III और IV
(B) II और III
(C) केवल III
(D) I, II, III और IV
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने निजता के अधिकार पर निम्नलिखित मामलों में विचार किया था:
एम.पी. शर्मा बनाम सतीश चंद्र, 1954 – यहाँ निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था।
खड़क सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 1963 – इसमें भी निजता के अधिकार पर चर्चा हुई, लेकिन इसे संवैधानिक रूप से मौलिक अधिकार नहीं माना गया।
पीयूसीएल बनाम भारत संघ, 1997 – टेलीफोन टैपिंग के मामले में निजता के अधिकार पर विचार हुआ।
के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ, 2017 – इस ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना गया।
इसलिए सभी चारों मामले (I, II, III, IV) निजता के अधिकार से संबंधित हैं।
सही विकल्प: (D) I, II, III और IV
- यदि भारत संघ द्वारा किसी अन्य देश को कोई क्षेत्र सौंप दिया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सी कार्रवाई आवश्यक है ?
(A) भारत संघ की कार्यकारी कार्रवाई
(B) राष्ट्रपति की घोषणा, जिसमें घोषणा जारी करते समय संवैधानिक शक्ति का प्रयोग किया जाता है
(C) भारत संघ की कार्यकारी कार्रवाई, और फिर संसद द्वारा विधायी अधिनियमन
(D) संसद द्वारा विधायी अधिनियमन, और फिर भारत संघ की कार्यकारी कार्रवाई
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के उपबंध 1 के अनुसार, भारत के क्षेत्र को किसी विदेशी राज्य को सौंपने के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है।
इसलिए, यह एक विधायी अधिनियमन द्वारा संसद के माध्यम से ही संभव है, न कि केवल कार्यकारी कार्रवाई से।
सही विकल्प: (D) संसद द्वारा विधायी अधिनियमन, और फिर भारत संघ की कार्यकारी कार्रवाई
- राष्ट्रपति ने एक प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय को भेजा है और सर्वोच्च न्यायालय ने, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के अनुसार, राष्ट्रपति को तदनुसार परामर्श दियाहै।
क्या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई सलाह को ‘न्यायिक दृष्टान्त पूर्वनिर्णय’माना जा सकता है ?
(A) नहीं,क्योंकि इसे निर्णय नहीं माना जाता है
(B) हाँ, क्योंकि इसे निर्णय माना जाता है
(C) नहीं, क्योंकि इसे खुली अदालत में नहीं सुनाया जाता है
(D) हाँ,क्योंकि इसे खुली अदालत में सुनाया जाता है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया परामर्श (सलाह) न्यायिक दृष्टान्त पूर्वनिर्णय (Judicial Precedent) नहीं माना जाता है, क्योंकि यह एक न्यायिक निर्णय नहीं है, बल्कि केवल एक राय (opinion) है।
इसलिए सही विकल्प है: (A)नहीं, क्योंकि इसे निर्णय नहीं माना जाता है।
- मानहानि के एक आपराधिक मुकदमे में, निचली अदालत, अर्थात् उच्च न्यायालय,ने दिए गए मामले से संबंधित किसी भी समाचार के प्रकाशन पर रोक लगा दी है। दिए गए आदेश को पारित करते समय उच्च न्यायालय ने निम्नलिखित में से किस संवैधानिक शक्ति
का प्रयोग किया है ?
(A) परमादेश रिट जारी करने की शक्ति
(B) प्रतिषेध रिट जारी करने की शक्ति
(C) अंतर्निहित शक्ति
(D) अवशिष्ट शक्ति
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 482 उच्च न्यायालय को अंतर्निहित शक्ति प्रदान करती है, जिसके तहत वह न्याय के हित में किसी भी आदेश को पारित कर सकता है।
मानहानि के मामले में समाचार प्रकाशन पर रोक लगाना, न्यायिक प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखने के लिए इसी अंतर्निहित शक्ति के अंतर्गत आता है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) अंतर्निहित शक्ति
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने घोषणा की है कि ‘सूचना का अधिकार’ भारत के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।
निम्नलिखितमें से कौन-सा प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार के स्रोत के रूप मेंप्रयुक्त होता है ?
(A) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1) (b)
(B) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
(C) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1) (a)
(D) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1) और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, सामूहिक रूप से
सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना का अधिकार को अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा माना है, क्योंकि बिना सूचना के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अधूरी है।
इसलिए सही विकल्प है:
(C) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a)
- भारतीय संविधान की निम्नलिखित में से कौन-सी अनुसूची ‘कुछ अधिनियमों और विनियमों के विधिमान्यकरण’ के विषय से
संबंधित है ?
(A) अनुसूची IX
(B) अनुसूची III
(C) अनुसूची V
(D) अनुसूची X
भारतीय संविधान की अनुसूची IX में कुछ अधिनियमों और विनियमों के विधिमान्यकरण का प्रावधान है।
इसे पहले संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था, ताकि भूमि सुधार और अन्य कानूनों को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण दिया जा सके।
सही विकल्प: (A) अनुसूची IX
- भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : यह अनुच्छेद लोकस स्टैन्डाय बारे में मौन है कि सर्वोच्च न्यायालय में कौन जा सकता है।
II. यह अनुच्छेद उस विरोधी पक्ष के बारे में मौन है जिसके विरुद्ध अनुच्छेद 32 के अंतर्गत राहत प्रदान की जा सकती है।
III. यह अनुच्छेद अपने दायरे में छठे प्रकार की रिट के लिए भी स्थान प्रदान करता है।
सही उत्तर का चयन कीजिए।
(A) I असत्य है।
(B) II असत्य है।
(C) III असत्य है।
(D) सभी कथन सत्य हैं।
सभी कथन सत्य हैं।
सही विकल्प: (D) सभी कथन सत्य हैं।
- अनुच्छेद 129 और 215 के अनुसार, भारत का सर्वोच्चन्यायालय और राज्यों के उच्चन्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं और उनके पास अवमानना का क्षेत्राधिकार है। इसी संबंध में निचली न्यायपालिका के बारे में क्या सत्य है ?
(A) निचली न्यायपालिका को अपनी अवमानना सहन करनी पड़ती है।
(B) निचली न्यायपालिका को अपनी अवमानना की शिकायत भारत के सर्वोच्च न्यायालय में करनी पड़ती
(C) निचली न्यायपालिका अवमानना करने वाले को उसकी अवमानना के लिएस्वयं दंडित कर सकती है।
(D) संबंधित उच्च न्यायालय उस अवमानना के मामले पर विचार कर सकते हैं जिसके क्षेत्राधिकार में निचली अदालत आती है ।
सही विकल्प है: (D) संबंधित उच्च न्यायालय उस अवमानना के मामले पर विचार कर सकते हैं जिसके क्षेत्राधिकार में निचली अदालत आती है।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आर. के. आनंद बनाम रजिस्ट्रार, दिल्ली उच्च न्यायालय (2009) 8 एससीसी 106 में एक वकील को निम्नलिखित कदाचार का दोषी ठहराया:
(A) कार्यवाही के दौरान न्यायाधीशों को धमकाने और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने केलिए।
(B) झूठेशपथ पत्र दाखिल करने और न्यायाधीशों के विरुद्ध बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए ।
(C) एक गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करके आपराधिक मुकदमे में हस्तक्षेप करने के लिए।
(D) एक कार्यरत मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध निंदनीय पर्चे प्रसारित करने के लिए।
मामला आर. के. आनंद बनाम रजिस्ट्रार, दिल्ली उच्च न्यायालय, (2009) 8 SCC 106 में, सर्वोच्च न्यायालय ने एक वकील को दोषी ठहराया था क्योंकि उसने न्यायाधीशों के विरुद्ध बेबुनियाद आरोप लगाए और झूठे शपथ पत्र दाखिल किए।
इसलिए सही विकल्प है: (B) झूठे शपथ पत्र दाखिल करने और न्यायाधीशों के विरुद्ध बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए।
- सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
सूची I सूची II
i. शून्य और शून्यकरणीय विवाहों से उत्पन्न संतानों की वैधता 1. धारा 10,हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
ii. द्विविवाह का दंड 2. धारा 2, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
iii.न्यायिक पृथक्करण 3. धारा 3 , हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
iv. शून्यकरणीय विवाह 4. धारा 4 , हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
कूट :
(A) i-3; ii–4; iii-1; iv-2
(B) i-4; ii–3; iii–2; iv-1
(C) i-4; ii–3; iii–1; iv-2
(D) i-l; ii–2; iii–4; iv-3
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार सही मिलान इस प्रकार है:
i. शून्य और शून्यकरणीय विवाहों से उत्पन्न संतानों की वैधता → धारा 16 → i-4
ii. द्विविवाह का दंड → धारा 17 (यह द्विविवाह को भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय बनाता है) → ii-3
iii. न्यायिक पृथक्करण → धारा 10 → iii-1
iv. शून्यकरणीय विवाह → धारा 12 → iv-2
इस प्रकार सही कूट है: i-4; ii-3; iii-1; iv-2
सही विकल्प: (C) i-4; ii-3; iii-1; iv-2
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अंतर्गत,यदि मूल चाणी, ऋण का कुछ भाग अदा न किया हुआ छोड़ से तथा यो या अधिकसह-जमानतदार हों, तो क्या होगा ?
(A) नाणदाता अकेले ही नाण का अदा न किया हुआ भाग वहन करता है
(B) प्राणी का परिवार अदान की हुई राशि के लिए उत्तरदायी हो जाता है
(C) सह-जमानती अदा न किए हुए भाग को समान अंश में बौटते हैं।
(D) सम्पूर्ण अदा न की हुईराशि का भुगतान पहले संपर्क किए गए जमानतवार द्वारा किया जाना है
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 146 के अनुसार, जहाँ दो या अधिक व्यक्ति एक ही ऋण या कर्तव्य के लिए सह-जमानतदार (co-sureties) होते हैं, वे सह-दायित्व (jointly liable) होते हैं, भले ही वे एक साथ या अलग-अलग बॉण्ड में बंधे हों।
लेकिन यदि मुख्य ऋणी कुछ भाग अदा नहीं करता है, तो सह-जमानतदारों के बीच दायित्व समान अंशों में बँट जाता है, जब तक कि अनुबंध में कुछ और निर्धारित न हो (धारा 147)।
इसलिए सही विकल्प है: (C) सह-जमानती अदा न किए हुए भाग को समान अंश में बाँटते हैं।
- विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 के अन्तर्गत,चल सम्पत्ति पर कब्जा रखने वाले प्रतिवादीको उसे वादी को सौंपने के लिए कम बाध्य किया जा सकता है ?
(A) जब संपत्ति वादी के एजेंट या ट्रस्टी के रूप में रखी जाती है
(B) जब संपत्ति वादी की गिरवी रखी गई संपत्ति के रूप में रखी जाती है
(C) जब संपत्ति वादी के पट्टेदार या उप-किरायेदार के रूप में रखी जाती है
(D) जब संपत्ति वादी के साथ सह-स्वामी के रूप में रखी जाती है
विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 11 के अनुसार, चल संपत्ति पर कब्जा रखने वाले प्रतिवादी को उसे वादी को सौंपने के लिए तब बाध्य किया जा सकता है जब:
संपत्ति वादी के एजेंट या ट्रस्टी के रूप में रखी गई हो,
और प्रतिवादी ने अपनी एजेंसी या ट्रस्ट समाप्त होने के बाद भी संपत्ति वापस नहीं की।
इसलिए सही विकल्प है: (A) जब संपत्ति वादी के एजेंट या ट्रस्टी के रूप में रखी जाती है।
- निम्नलिखित कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें:
कथन 1 : प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 के अंतर्गत, दो या दो से अधिक राज्यों के लिए एक संयुक्त प्रशासनिक
अधिकरण उन राज्यों के लिए एक प्रशासनिक अधिकरण के समान अधिकार क्षेत्र, शक्तियों और प्राधिकार का प्रयोग करता है।
कथन 2: अवमानना के प्रयोजनों के लिए, एक अधिकरण उच्च न्यायालय के समान शक्तियों का प्रयोग करता है, और न्यायालय
अवमान अधिनियम, 1971 में “उच्च न्यायालय” के संदर्भों मेंऐसे अधिकरणों को शामिल करने के लिए व्याख्या की जाती है।
प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 के अंतर्गत उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में,निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?
(A) कथन 1 और 2 दोनों असत्य हैं
(B) केवल कथन । सत्य है
(C) केवल कथन 2 सत्य है
(D) दोनों कथन सत्य हैं
प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 4(2) के अनुसार, संयुक्त प्रशासनिक अधिकरण का गठन किया जा सकता है और उसके पास वही अधिकार क्षेत्र, शक्तियाँ और प्राधिकार होंगे जो एक राज्य प्रशासनिक अधिकरण के पास हैं।
→ कथन 1 सही है।
धारा 17 के अनुसार, एक अधिकरण के पास अवमानना के लिए उच्च न्यायालय जैसी शक्तियाँ होती हैं, और न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971 में “उच्च न्यायालय” के संदर्भ में ऐसे अधिकरणों को शामिल किया गया है।
→ कथन 2 सही है।
इसलिए सही विकल्प है: (D) दोनों कथन सत्य हैं।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं,जिनमें से एक को अभिकथन (A)और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): धन विधेयक केवल लोक सभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, राज्य सभा में नहीं।
कारण (R) :राज्य सभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक पर केवल सिफारिशें कर सकती है, लेकिन लोक सभा उन्हें स्वीकार या
अस्वीकार कर सकती है, और किसी भी स्थिति में, विधेयक पारित माना जाता है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 109 के अंतर्गत उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सत्य है,लेकिन (R) असत्य है।
(D) (A) असत्य है, लेकिन (R)सत्य है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार:
अभिकथन (A): “धन विधेयक केवल लोक सभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, राज्य सभा में नहीं।”
→ यह सही है (अनुच्छेद 109(1))।
कारण (R): “राज्य सभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक पर केवल सिफारिशें कर सकती है, लेकिन लोक सभा उन्हें स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है, और किसी भी स्थिति में, विधेयक पारित माना जाता है।”
→ यह भी सही है (अनुच्छेद 109(5))।
लेकिन क्या (R), (A) की सही व्याख्या है?
(A) का कारण यह है कि धन विधेयक लोक सभा में ही पेश किए जा सकते हैं, क्योंकि लोक सभा को धन पर अधिक शक्ति दी गई है। (R) में बताया गया है कि राज्य सभा की भूमिका सीमित है, जो (A) के कारण को स्पष्ट करता है। इसलिए (R), (A) की सही व्याख्या है।
सही विकल्प:
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत पंजीकृत किसी कंपनी को परिचालन शुरू करने से पहले व्यवसाय प्रारंभ करने की घोषणा
दाखिल करनी होती है। निदेशक इस दायित्व की अनदेखी करते हैं और फर्म घोषणादाखिल किए बिना ही व्यावसायिक गतिविधियाँ
शुरू कर देती है। इस तरह की गैर-अनुपालन के लिए संबंधित रजिस्ट्रार द्वारा कंपनी पर कितना जुर्माना लगाया जा सकता है ?
(A) 25,000
(C) 75,000
(B) ₹50,000
(D) ₹ 1,00,000
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 11(1) के अनुसार, कंपनी को व्यवसाय प्रारंभ करने का प्रमाणपत्र (Certificate of Commencement of Business) प्राप्त करने के बाद ही व्यावसायिक गतिविधियाँ शुरू करनी चाहिए।
यदि कंपनी बिना इस प्रमाणपत्र के व्यवसाय शुरू करती है, तो धारा 11(2) के तहत कंपनी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है, और प्रत्येक निदेशक पर ₹1,000 प्रतिदिन का जुर्माना लग सकता है, जब तक कि उल्लंघन जारी रहता है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) ₹50,000
- यदि कई अपराधों के लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा अपराध कियागया है, तो भारतीय
दंड संहिता की धारा 72 आनुपातिक न्याय कैसे सुनिश्चित करती है ?
(A) सबसे कम निर्धारित अवधि वाले अपराध के लिए दंड लगाकर
(B) सभी संभावित अपराधों के औसत के बराबर दंड लगाकर
(C) दंड का विकल्प अभियोजन अधिकारी पर छोड़कर
(D) आगे स्पष्टीकरण होने तक दंड को निलंबित करके
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 72 के अनुसार, यदि यह अनिश्चित हो कि कौन-सा अपराध किया गया है और अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग दंड हैं, तो दोषी को सबसे कम दंड वाले अपराध के अनुसार दंडित किया जाएगा।
इसलिए सही विकल्प है: (A) सबसे कम निर्धारित अवधि वाले अपराध के लिए दंड लगाकर
- श्रीमान X एक बेकरी के मालिक हैं जहाँ वे 16-वर्षीय किशोर ४को काम पर रखते हैं। शुरुआत में, X, Y को प्रत्येक रविवार को
साप्ताहिक अवकाश देता है। दो महीने बाद, X साप्ताहिक अवकाश को बुधवार करने का फैसला करता है और इस बदलाव के बारे
में बेकरी की दीवार पर एक नोटिस चिपका देता है। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार,
यह बदलाव…
(A) विधिमान्य है, क्योंकि नियोक्ता किसी भी समय नोटिस देकर छुट्टियों में बदलाव कर सकते हैं।
(B) अविधिमान्य है, क्योंकि साप्ताहिक छुट्टियों में कम-से-कम तीन महीने पूरे होने से पहले बदलाव नहीं किया जा सकता।
(C) विधिमान्य है, क्योंकि किशोर को प्रत्येक सप्ताह एक पूरा दिन आराम दिया जाता है।
(D) केवल तभी अविधिमान्य होगा जब सूचना संस्थान में प्रदर्शित न की गई हो ।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 13 और बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) नियम, 1988 के नियम 13 के अनुसार, साप्ताहिक अवकाश का दिन बदलने के लिए कम से कम तीन महीने पहले सूचना दी जानी चाहिए।
यहाँ केवल दो महीने बाद ही बदलाव किया गया है, इसलिए यह अविधिमान्य है।
सही विकल्प: (B) अविधिमान्य है, क्योंकि साप्ताहिक छुट्टियों में कम-से-कम तीन महीने पूरे होने से पहले बदलाव नहीं किया जा सकता।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की परिभाषा के तहत किस व्यक्ति को उपभोक्ता नहीं माना जाएगा ?
(A) वह व्यक्ति जो घरेलू उपयोग के लिए किश्तों पर रेफ्रिजरेटर खरीदता है।
(B) वह व्यक्ति जो पारिवारिक उपयोग के लिए आंशिक रूप से भुगतान औरआंशिक रूप से वादा किया हुआ टेलीविजन खरीदताहै।
(C) वह व्यक्ति जो पुनर्विक्रय या किसी व्यावसायिक उद्देश्य से सामान खरीदता है।
(D) वह व्यक्ति जो किसी रिश्तेदार द्वारा खरीदे गए फर्नीचर का उसकी सहमति से उपयोग करता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) में उपभोक्ता की परिभाषा दी गई है।
इसके अनुसार, कोई व्यक्ति जो वस्तु या सेवाएँ पुनर्विक्रय या किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए खरीदता है, उपभोक्ता नहीं माना जाएगा।
इसलिए सही विकल्प है: (C) वह व्यक्ति जो पुनर्विक्रय या किसी व्यावसायिक उद्देश्य से सामान खरीदता है।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं,जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): भारत के राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिएदोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्तिको क्षमादान, विलंब, राहत या
दंड में छूट देने, या दंड को निलंबितकरने, माफ करने या लघुकृत करने की शक्ति है,बशर्ते कि दंड सैन्य न्यायालय द्वारा दिया गया हो या दंड मृत्युदंड हो ।
कारण (R): अनुच्छेद 72 के तहत यह शक्ति राज्य के कानून के तहत मृत्युदंड को माफ करने या लघुकृत करने की राज्यपाल की शक्तियों को रद्द कर देती है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सहीव्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
(D) (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
अनुच्छेद 72 के तहत, राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, जिसमें मृत्युदंड सहित किसी भी दंड को क्षमा, निलंबित, लघुकृत आदि करने का अधिकार है, चाहे वह दंड सैन्य न्यायालय द्वारा दिया गया हो या अन्य।
→ अभिकथन (A) सही है।
राज्यपाल को अनुच्छेद 161 के तहत भी क्षमादान की शक्ति है, लेकिन मृत्युदंड के मामले में राष्ट्रपति की शक्ति ही मान्य होगी।
हालाँकि, राष्ट्रपति की शक्ति राज्यपाल की शक्ति को रद्द नहीं करती, बल्कि मृत्युदंड के मामले में राज्यपाल की शक्ति सीमित है।
→ कारण (R) असत्य है क्योंकि यह पूरी तरह से रद्द नहीं करती।
इसलिए सही विकल्प: (C) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
- निम्नलिखित प्रश्न में, एक कथन के बाद दो निष्कर्ष, I और II दिए गए हैं।
कथन :
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत,एक मजिस्ट्रेट प्रत्यर्थी को घरेलूहिंसा के कृत्य करने,पीड़ित व्यक्ति से
संपर्क करने, बिना अनुमति के संपत्ति या स्त्रीधन को संक्रामित (हस्तांतरित) करने, या उसके आश्रितों को नुकसान पहुँचाने से रोकने
के लिए सुरक्षा आदेश जारी कर सकता है।
निष्कर्ष :
I. एक सुरक्षा आदेश न केवल शारीरिक हिंसा, बल्कि घरेलू हिंसा के वित्तीय और भावनात्मक पहलुओं को भी कवर कर सकता
है।
II. मजिस्ट्रेट के पास पीड़ित व्यक्ति और उसके आश्रितों की सुरक्षा के लिए प्रत्यर्थी के आचरण को प्रतिबंधित करने की व्यापक
शक्तियाँ हैं।
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत उपर्युक्त कथन और निष्कर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा
सही है ?
(A) केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है
(B) केवल निष्कर्ष II अनुसरण करता है
(C) निष्कर्ष I और II दोनों अनुसरण करते हैं
(D) न तो निष्कर्ष I और न ही II अनुसरण करता है
दोनों निष्कर्ष कथन से तर्कसंगत और कानूनी रूप से अनिवार्य रूप से निकलते हैं।
सही उत्तर: (C) निष्कर्ष I और II दोनों अनुसरण करते हैं।
- मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार,ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय लाइसेंसिंग प्राधिकारी का अधिकार क्षेत्र
किस कारक पर निर्भर करताहै ?
(A) वह स्थान जहाँ आवेदक की पारिवारिक पैतृक संपत्ति है।
(B) वह स्थान जहाँ आवेदक का एक वर्ष से अधिक समय से बैंक खाता है।
(C) वह स्थान जहाँ आवेदक स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान करता है।
(D) वह स्थान जहाँ आवेदक सामान्यतः निवास करता है या व्यवसाय करता है।
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 9(1) के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन उस क्षेत्र के लाइसेंसिंग प्राधिकारी को किया जाता है, जिस क्षेत्र में आवेदक सामान्यतः निवास करता है या अपना व्यवसाय/रोजगार करता है।
इसलिए सही विकल्प है: (D) वह स्थान जहाँ आवेदक सामान्यतः निवास करता है या व्यवसाय करता है।
- यदि आजीवन कारावास की सजा पाए किसी दोषी को भारतीय दंड संहिता की धारा 57 के तहत सजा में छूट देने (भिन्नों) पर विचार
किया जा रहा है, तो न्यायालय द्वारा कितने वर्षों की समतुल्य अवधि लागू की जाएगी ?
(A) दस वर्ष का कारावास
(B) बीस वर्ष का कारावास
(C) चालीस वर्ष का कारावास
(D) पचास वर्ष का कारावास
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 57 के अनुसार, आजीवन कारावास की सजा की गणना के लिए बीस वर्ष के समतुल्य माना जाता है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) बीस वर्ष का कारावास।
- उपदान संदाय (ग्रेच्युटी भुगतान) अधिनियम, 1972के अनुसार,किन परिस्थितियों में किसी कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा
ग्रेच्युटी भुगतान के लिए पाँच वर्ष कीनिरंतर सेवा पूरी करना अनिवार्य नहीं है ?
(A) कर्मचारी द्वारा पद सेस्वैच्छिक त्यागपत्र ।
(B) कार्यस्थल पर कदाचार के कारण कर्मचारी की बर्खास्तगी।
(C) दुर्घटना या बीमारी के कारण कर्मचारी की मृत्यु या विकलांगता
(D) कर्मचारी का उसी संगठन के किसी अन्य विभाग में स्थानांतरण ।
उपदान संदाय (ग्रेच्युटी भुगतान) अधिनियम, 1972 की धारा 4(1) के अनुसार, पाँच वर्ष की निरंतर सेवा की शर्त मृत्यु या विकलांगता के मामले में लागू नहीं होती।
इसलिए सही विकल्प है: (C) दुर्घटना या बीमारी के कारण कर्मचारी की मृत्यु या विकलांगता।
- यदि कोई बेलिफ किसी सिविल न्यायालय के आदेश के आधार पर बेदखली करता है, जिसे बाद में अधिकार क्षेत्र के अभाव में शून्य घोषित करदिया जाता है,तो भारतीय दंड संहिता की धारा 78क्या सुरक्षा प्रदान करती है ?
(A) बेलिफ दंडनीय है क्योंकि आदेश शुरू से ही अमान्य था।
(B) बेलिफ को केवल कम दंड से ही दंडित किया जा सकता है।
(C) यदि बेलिफ ने आदेश के तहत सद्भावनापूर्वक कार्य किया है,तो उसे छूट प्राप्त है
(D) बेलिफ को बेदखल व्यक्ति को मुआवजा देना आवश्यक है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 78 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी न्यायालय के आदेश के अनुसार कार्य करता है, भले ही वह न्यायालय उस कार्यवाही के लिए सक्षम न हो, तब भी वह व्यक्ति उस कार्य के लिए दंडित नहीं किया जाएगा, बशर्ते कि उसने सद्भावपूर्वक उस आदेश का पालन किया हो।
इसलिए सही विकल्प है: (C) यदि बेलिफ ने आदेश के तहत सद्भावनापूर्वक कार्य किया है, तो उसे छूट प्राप्त है।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत, एक अपराधी को एक समय में अधिकतम कितने दिनों तक एकांत कारावास (परिरोध) में रखा जा सकता है ?
(A) सात
(B) दस
(C) चौदह
(D) इक्कीस
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 7(2) के अनुसार, एकांत कारावास (Solitary Confinement) की अवधि एक समय में चौदह दिन से अधिक नहीं हो सकती।
इसलिए सही विकल्प है: (C) चौदह
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार, मोटर वाहन दुर्घटना में हुई मृत्यु की स्थिति में दोष रहित दायित्व के अंतर्गत देय मुआवजे की निश्चित राशि क्या है ?
(A) पच्चीस हजार रुपये।
(B) पचास हजार रुपये
(C) एक लाख रुपये
(D) पचहत्तर हजार रुपये
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 140 के अनुसार, दुर्घटना में मृत्यु होने पर दोष रहित दायित्व (No-fault liability) के तहत निश्चित मुआवजा ₹50,000 है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) पचास हजार रुपये
- निम्नलिखित कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें।
कथन 1 :भारतीय दंड संहिता के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे अपराधी को शरण देता है जो 3वर्ष तक के कारावास से दंडनीय
अपराध के लिए हिरासत से भाग गया है, तो उसे 7 वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा।
कथन 2: कानून अपराधी के पति या पत्नी द्वारा शरण देने या छिपाने के लिए एक अपवाद प्रदान करता है।
भारतीय दंड संहिता के तहत उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?
(A) कथन 1 और 2 दोनों असत्य हैं
(B) केवल कथन 1सत्य है
(C) केवल कथन 2 सत्य है
(D) दोनों कथन सत्य हैं
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 130 के अनुसार:
कथन 1 — यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसे अपराधी को शरण देता है जो 10 वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के लिए हिरासत से भागा है, तो उसे 7 वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जा सकता है। लेकिन यदि अपराध 3 वर्ष तक के कारावास से दंडनीय है, तो शरण देने पर दंड अलग है (धारा 130 लागू नहीं होती)। इसलिए कथन 1 असत्य है।
कथन 2 — IPC की धारा 130 में अपवाद है कि अपराधी का पति या पत्नी शरण देने के लिए दंडित नहीं होगा। यह सत्य है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) केवल कथन 2 सत्य है
- यदि कोईव्यक्ति अधिकतम 10 वर्ष के कारावास से दंडनीय अपराध का प्रयास करता है, तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 62 के अंतर्गत अधिकतम कितने वर्ष का कारावास दिया जा सकता है ?
(A) पाँच वर्ष
(C) दस वर्ष
(B) सात वर्ष
(D) तीन वर्ष
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 62(1) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध का प्रयास करता है जिसके लिए अधिकतम सजा का प्रावधान है, तो उसे उस अपराध के लिए निर्धारित दंड का आधा दिया जा सकता है।
यहाँ अधिकतम सजा 10 वर्ष है, तो प्रयास के लिए अधिकतम सजा = 10 / 2 = 5 वर्ष होगी।
सही विकल्प: (A) पाँच वर्ष
- 14 वर्ष की आयुके एक किशोर कोन्यायालय में ऐसे अपराध के लिए लाया जाताहै जो मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है। यह मामला मुख्यतः दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के किस प्रावधान के अंतर्गत आएगा ?
(A) धारा 27
(C) धारा 302
(B) धारा 125
(D) धारा 482
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 27 के अनुसार, यदि कोई अपराध ऐसा है जो मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है, और वह व्यक्ति 16 वर्ष से कम आयु का है, तो उसे बाल न्यायालय (Juvenile Court) में पेश किया जा सकता है।
यहाँ 14 वर्ष का किशोर है और अपराध मृत्युदंड/आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं है, इसलिए यह धारा 27 के अंतर्गत आएगा।
सही विकल्प: (A) धारा 27
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 290(1) के अंतर्गत, आरोप तय होने की तिथि से कितने दिनों के भीतर कोई अभियुक्त सौदा अभिवाक् के लिएआवेदन दायर कर सकताहै?
(A)15
(B)30
(C)45
(D)60
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 290(1) के अनुसार, आरोप तय होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर अभियुक्त सौदा अभिवाक् (Plea Bargaining) के लिए आवेदन दे सकता है।
सही विकल्प: (B) 30
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत, यदि किसी व्यक्ति को ₹ 4,000 का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया जाता है, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो न्यायालय द्वारा चूककर्ता पर अधिकतम कितना साधारण कारावास लगाया जा सकता है ?
(A) एक वर्ष
(C) चार महीने
(B) दो महीने
(D) छह महीने
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 25(1) के अनुसार, यदि जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो न्यायालय चूककर्ता को साधारण कारावास दे सकता है।
जुर्माने की राशि और कारावास की अवधि का अनुपात दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 421 के सिद्धांत पर आधारित है।
सामान्य नियम है:
₹5,000 तक के जुर्माने के लिए अधिकतम दो महीने का कारावास।
यहाँ ₹4,000 का जुर्माना है, इसलिए अधिकतम दो महीने का साधारण कारावास हो सकता है।
सही विकल्प: (B) दो महीने
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अंतर्गत, ऐसे तथ्य जो अन्यथा अप्रासंगिक हैं,उन्हें कब प्रासंगिक माना जा सकता है ?
(A) केवल तभी जब वे अभियुक्त के अपराध को प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध करते हों
(B) केवल तभी जब वे मृत्युकालिक कथन का भाग हों
(C) जब वे किसी विवाद्यक तथ्य या प्रासंगिक तथ्य से असंगत हों
(D) जब वे लिखित रूप में की गई स्वीकृति का भाग हों
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 11 के अनुसार, ऐसे तथ्य जो अन्यथा अप्रासंगिक हैं, उन्हें तब प्रासंगिक माना जा सकता है जब वे किसी विवाद्यक तथ्य या प्रासंगिक तथ्य से असंगत हों।
इसका आशय यह है कि यदि कोई तथ्य किसी विवादित मामले के लिए प्रासंगिक तथ्य के विपरीत है या उससे असंगत है, तो उसे साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
सही विकल्प: (C) जब वे किसी विवाद्यक तथ्य या प्रासंगिक तथ्य से असंगत हों।
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 33 के अंतर्गत पूर्व साक्ष्य के प्रासंगिक होने के लिए कौन-सी शर्त पूरी होनी चाहिए?
(A) साक्ष्य जूरी की उपस्थिति में दर्ज किया गया होगा।
(B) कार्यवाही उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियोंके बीच हुई हो ।
(C) साक्ष्य सरकारी राजपत्र में प्रकाशित हुआ होगा।
(D) साक्ष्य की पुष्टिविशेषज्ञ की राय से हुई होगी।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 33 के अनुसार, किसी पूर्व कार्यवाही में दिया गया साक्ष्य बाद की कार्यवाही में प्रासंगिक हो सकता है, यदि:
गवाह की मृत्यु हो गई हो, या
गवाह को ढूँढना असंभव हो, या
गवाह देने में असमर्थ हो, या
गवाह को पेश करना अत्यधिक व्यय या देरी का कारण हो,
और
महत्वपूर्ण बात — कार्यवाही उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच हुई हो तथा विपक्षी को पूर्व सुनवाई में गवाह को क्रॉस-एग्जामिन करने का अवसर मिला हो।
इसलिए सही विकल्प है: (B) कार्यवाही उन्हीं पक्षों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच हुई हो।
- एक अदालती मुकदमे के दौरान,बचाव पक्ष के वकील ने साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कुछ दस्तावेजों की स्वीकार्यता पर आपत्ति
जताई । न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि केवल भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के तहत सार्वजनिक दस्तावेजों के रूप में वर्गीकृत
दस्तावेजों को ही बिना किसी ठोस सबूत केस्वीकार किया जा सकता है। इस संदर्भ में,किस श्रेणी के दस्तावेज सार्वजनिक दस्तावेजों
में शामिल होंगे ?
(A) व्यक्तियों के बीच समझौतों का मसौदा
(B) सरकारी अधिकारियों की व्यक्तिगत डायरियाँ
(C) किसी निजी कंपनी के आंतरिक नोट्स
(D) सरकारी अधिकारियों के न्यायिक और कार्यकारी कार्य
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 74 के अनुसार, सार्वजनिक दस्तावेज वे हैं जो:
राज्य की संप्रभुता, कार्यपालिका, न्यायपालिका से संबंधित हों,
या सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में तैयार किए गए हों।
इसमें न्यायिक दस्तावेज (जैसे न्यायालय के आदेश, डिक्री) और कार्यकारी दस्तावेज (जैसे सरकारी अधिसूचना, अधिनियम, आदेश) शामिल हैं।
इसलिए सही विकल्प है: (D) सरकारी अधिकारियों के न्यायिक और कार्यकारी कार्य
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत एक षड्यंत्रकारी द्वारा कही या की गई बातों को दूसरों के विरुद्ध स्वीकार्य होने के लिए
कौन सी शर्त पूरी होनी चाहिए ?
(A) बयान षड्यंत्र समाप्त होने के बाद दिया जाना चाहिए
(B) बयान में व्यक्तिगत लाभ के असंबंधित मामले शामिल होने चाहिए
(C) यह मानने के लिए उचित आधार होना चाहिए कि षड्यंत्र मौजूद है
(D) यह प्रमाण होना चाहिए कि प्रत्येक षड्यंत्रकारी ने व्यक्तिगत रूप से कृत्य किया है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 10 (यह 2023 संस्करण में भी समान सिद्धांत है) के अनुसार, षड्यंत्रकारियों में से एक द्वारा कही या की गई बातें दूसरे षड्यंत्रकारियों के विरुद्ध तभी स्वीकार्य होती हैं, जब:
यह मानने के लिए उचित आधार हो कि दो या अधिक व्यक्ति षड्यंत्र में शामिल हैं, और
ऐसा कथन या कृत्य उसी षड्यंत्र के संदर्भ में, उसके उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए किया गया हो।
इसलिए सही विकल्प है: (C) यह मानने के लिए उचित आधार होना चाहिए कि षड्यंत्र मौजूद है
- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 30 के अनुसार, यदि कोई मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को दो वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा
सुनाता है, तो जुर्माना न चुकाने पर वह अधिकतम कितनी कारावास की सजा दे सकता है ?
(A) 1 वर्ष
(B) 2 वर्ष
(C) 6 महीने
(D) 3 महीने
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 30 के अनुसार, यदि मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को कारावास और जुर्माना दोनों की सजा सुनाता है, और जुर्माना नहीं चुकाया जाता है, तो अतिरिक्त कारावास की अवधि मजिस्ट्रेट की सजा देने की शक्ति से अधिक नहीं हो सकती।
एक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट अधिकतम 2 वर्ष का कारावास दे सकता है।
यदि पहले से ही 2 वर्ष का कारावास दिया गया है, तो जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त कारावास नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कुल सजा मजिस्ट्रेट की शक्ति से अधिक नहीं हो सकती।
लेकिन धारा 30 में कहा गया है कि जहाँ जुर्माना नहीं भरा जाता, वहाँ कारावास की अवधि मजिस्ट्रेट की सजा सुनाने की शक्ति की एक-चौथाई से अधिक नहीं होगी, या जुर्माने के लिए दी जाने वाली सजा के प्रावधानों के अनुसार होगी।
सामान्य नियम:
मजिस्ट्रेट की सजा सुनाने की शक्ति = 2 वर्ष (24 महीने)
एक-चौथाई = 6 महीने
इसलिए अधिकतम 6 महीने का अतिरिक्त कारावास दिया जा सकता है।
सही विकल्प: (C) 6 महीने
- भारतीय संविधान के अनुसार, 86 वें संविधान संशोधन के बाद, छह वर्षसे कम आयु के बच्चोंकी प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल
और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस नीति निदेशक सिद्धांत (तत्त्व) को संशोधित किया गया था ?
(A) अनुच्छेद 39
(B) अनुच्छेद 41
(C) अनुच्छेद 47
(D) अनुच्छेद 45
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा अनुच्छेद 45 को संशोधित किया गया था, जिसमें छह वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रावधान किया गया।
इसलिए सही विकल्प है: (D) अनुच्छेद 45
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अनुसार, जब किसीनिष्पादन आदेश को अपील में चुनौती दी जाती है, तो डिक्री पारित करने
वाले न्यायालय को सुरक्षा लेने का निर्देश कौन दे सकता है ?
(A) केवल याचिका अधिकारिता का प्रयोग करने वाला उच्च न्यायालय
(B) अपील की सुनवाई करने वाला अपीलीय न्यायालय its f o butters alonders and in
(C) संपत्ति अभिलेखों का जिला रजिस्ट्रार
(D) संबंधित अधिकारिता का पुलिस प्राधिकारी
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की Order XLI Rule 5 के अनुसार, अपील की सुनवाई करने वाला अपीलीय न्यायालय ही डिक्री पारित करने वाले न्यायालय को सुरक्षा लेने का निर्देश दे सकता है, जब डिक्री को अपील में चुनौती दी गई हो।
इसलिए सही विकल्प है: (B) अपील की सुनवाई करने वाला अपीलीय न्यायालय।
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत, कितने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियम समिति की न्यायिक सदस्यता का गठन
करते हैं ?
(A) उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीश
(B) उच्च न्यायालय केदो न्यायाधीश
(C) उच्चन्यायालय के चार न्यायाधीश
(D) उच्च न्यायालय के पाँच न्यायाधीश
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 122 के अनुसार, उच्च न्यायालय की नियम समिति में उच्च न्यायालय के चार न्यायाधीश न्यायिक सदस्य के रूप में होते हैं।
इसलिए सही विकल्प है: (C) उच्च न्यायालय के चार न्यायाधीश।
- प्रतिलिप्यधिकार (कॉपीराइट) अधिनियम, 1957 के अनुसार, धारा 63 के अंतर्गत कॉपीराइट उल्लंघन के लिए सामान्यतः सजा क्या है ?
(A) तीन वर्ष तक का कारावास और दो लाख रुपये तक का जुर्माना
(B) दो वर्ष तक का कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना
(C) पाँच वर्ष तक का कारावास और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना
(D) सातवर्ष तक का कारावास और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना
प्रतिलिप्यधिकार (कॉपीराइट) अधिनियम, 1957 की धारा 63 के अनुसार, कॉपीराइट उल्लंघन के लिए सजा है:
कम से कम 6 महीने का कारावास, जो 3 वर्ष तक बढ़ सकता है, और
कम से कम ₹50,000 का जुर्माना, जो ₹2,00,000 तक बढ़ सकता है।
इसलिए सही विकल्प है: (A) तीन वर्ष तक का कारावास और दो लाख रुपये तक का जुर्माना
- भारतीय संविधान के अनुसार, भारत में एक भाषाई समुदाय अपनी विशिष्ट लिपि और साहित्य को संरक्षित रखना चाहता है।
कौन-सा संवैधानिक प्रावधान उन्हें इसके संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है?
(A) अनुच्छेद 28(1)
(C) अनुच्छेद 30 (2)
(B) अनुच्छेद 29(1)
(D) अनुच्छेद 32
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 29(1) कहता है:
“भारत के राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।”
इसलिए भाषाई समुदाय को अपनी लिपि और साहित्य के संरक्षण का अधिकार अनुच्छेद 29(1) से मिलता है।
सही विकल्प: (B) अनुच्छेद 29(1)
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 58 के अंतर्गत ₹ 5,000 से अधिक की डिक्री राशि के लिए सिविल जेल में हिरासत की
अधिकतम अवधिक्या है ?
(A) छह सप्ताह
(B) दो महीने
(C) तीन महीने
(D) छह महीने
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 58 और तालिका 1 के अनुसार:
यदि डिक्री राशि ₹5,000 से अधिक है, तो हिरासत की अधिकतम अवधि तीन महीने है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) तीन महीने
- निम्नलिखित में से कौन-सी परिस्थिति सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 58(1)(b) के अंतर्गत आती है ?
(A) ₹ 1,800 कीडिक्री, तीन महीने तक की हिरासत
(B) ₹3,500 की डिक्री, छह सप्ताह तक की हिरासत
(C) ₹ 6,200 की डिक्री, छह महीने तक की हिरासत
(D) ₹ 10,000 की डिक्री, एक वर्ष तक की हिरासत
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 58(1)(b) और तालिका 1 के अनुसार:
₹2,000 से अधिक लेकिन ₹5,000 तक की डिक्री राशि के लिए हिरासत की अधिकतम अवधि छह सप्ताह है।
विकल्पों में:
(A) ₹1,800 → ₹2,000 से कम है, अधिकतम हिरासत 6 सप्ताह नहीं (गलत)
(B) ₹3,500 → ₹2,000–₹5,000 के बीच है, अधिकतम हिरासत छह सप्ताह (सही)
(C) ₹6,200 → ₹5,000 से अधिक है, अधिकतम हिरासत 3 महीने (गलत)
(D) ₹10,000 → ₹5,000 से अधिक है, अधिकतम हिरासत 3 महीने (गलत)
सही विकल्प: (B) ₹3,500 की डिक्री, छह सप्ताह तक की हिरासत
- अजय के विरुद्ध एक दीवानी वाद दायर किया गया है और न्यायालय उसे उपस्थित होने के लिए समन जारी करताहै। समन प्राप्त
होने के बाद, अजय अपने वकील से सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत अपने बचाव मेंलिखित बयान दाखिल करने की
समय-सीमा समझने के लिए परामर्श करताहै। समन की तामील की तिथि से कितने दिनोंके भीतर उसे अपना लिखित बयान प्रस्तुत
करना होगा ?
(A) तीस दिन
(C) साठ दिन
(B) पंद्रह दिन
(D) नब्बे दिन
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की Order V Rule 1 और Order VIII Rule 1 के अनुसार, प्रतिवादी को समन की तामील की तारीख से 30 दिनों के भीतर लिखित बयान (written statement) दाखिल करना होता है।
न्यायालय, पर्याप्त कारण दिखाए जाने पर इस अवधि को बढ़ा सकता है, लेकिन कुल 120 दिन से अधिक नहीं।
इसलिए सामान्य समय-सीमा है: (A) तीस दिन
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 14A(1) के अंतर्गत दिया गया पंजीकृत पता, यदि परिवर्तित न किया जाए, तो कितने समय
तक वैध रहता है ?
(A) मामले के अंतिम निर्धारण के छह वर्ष बाद
(B) वाद प्रस्तुत करने के तीन वर्ष बाद
(C) मामले के अंतिम निर्धारण के दो वर्ष बाद
(D) डिक्री की तिथि से पाँच वर्ष
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 14A(1) के अनुसार, एक वादी द्वारा दिया गया पंजीकृत पता, यदि परिवर्तित न किया जाए, तो मामले के अंतिम निर्धारण के दो वर्ष बाद तक वैध रहता है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) मामले के अंतिम निर्धारण के दो वर्ष बाद
- माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 25 (a) के अनुसार, यदि दावेदार पर्याप्त कारण के बिना अपना दावा विवरण
प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो क्या होगा ?
(A) अधिकरण मामले को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर देता है
(B) अधिकरण जुर्माना लगाता है, लेकिन कार्यवाही जारी रखता है।
(C) अधिकरण यह मान लेता है कि दावा स्वीकार कर लिया गया है।
(D) अधिकरण कार्यवाही समाप्त कर देता है।
माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 25(a) के अनुसार, यदि दावेदार बिना पर्याप्त कारण के अपना दावा विवरण (statement of claim) प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो अधिकरण (Tribunal) कार्यवाही समाप्त कर देगा।
इसलिए सही विकल्प है: (D) अधिकरण कार्यवाही समाप्त कर देता है।
- यदि कोई मामला विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 10 के अंतर्गत केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाता है, तो उसके निर्णय के पश्चात विवाह संपन्न कराने की समय सीमा क्या है ?
(A) एक माह
(C) छह माह
(B) दो माह
(D) तीन माह
विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 10(2) के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा निर्णय लेने के बाद, विवाह का संस्कार तीन महीने के भीतर संपन्न कराया जाना चाहिए।
इसलिए सही विकल्प है: (D) तीन माह
- घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 31 के तहत संरक्षण आदेश के उल्लंघन के लिए कारावास की अधिकतम
अवधि क्या है ?
(A) छह महीने
(B) एक वर्ष
(C) दो वर्ष 2920222
(D) तीन वर्ष
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 31 के अनुसार, संरक्षण आदेश के उल्लंघन के लिए अधिकतम सजा एक वर्ष का कारावास और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
इसलिए सही विकल्प है: (B) एक वर्ष
- भारतीय संविधान के किस प्रावधान के तहत जनहित याचिका (PIL) सीधे सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है ?
(A) अनुच्छेद 21
(B) अनुच्छेद 32
(C) अनुच्छेद 226
(D) अनुच्छेद 14
अनुच्छेद 32 भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय में सीधे याचिका दायर करने का अधिकार देता है।
जनहित याचिका (PIL) इसी के तहत सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) अनुच्छेद 32
- भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के अंतर्गत, नोटिस के प्रकाशन और कलेक्टर के समक्ष हितबद्ध व्यक्तियों की उपस्थिति के बीच
न्यूनतम कितनी अवधि बीतनी चाहिए ?
(A) 7 दिनों से कम नहीं
(B) 60 दिनों से कम नहीं
(C) 15 दिनों से कम नहीं
(D) 30 दिनों से कम नहीं
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 9(2) के अनुसार, नोटिस के प्रकाशन और कलेक्टर के समक्ष हितबद्ध व्यक्तियों की उपस्थिति के बीच न्यूनतम 15 दिन का अंतराल होना चाहिए।
इसलिए सही विकल्प है: (C) 15 दिनों से कम नहीं।
- किस प्रावधान के तहत कोई नागरिक जनहित के मुद्दों के संबंध में मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक मामला दायर कर सकता
है?
(A) भारतीय दंड संहिता की धारा 302
(B) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारां 144,
(C) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 133
(D) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 482
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 133 के तहत, कोई भी व्यक्ति जनहित से संबंधित कुछ सार्वजनिक उपद्रवों (जैसे – सार्वजनिक नुकसान, बाधा, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक व्यवसाय आदि) के निवारण हेतु मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सकता है।
यह एक जनहित याचिका जैसा प्रावधान है जो स्थानीय स्तर पर लागू होता है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 133
- आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44 AA (2) (i) के अनुसार, व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को खाताबही रखनी होगी यदि
व्यवसाय या पेशे से आय निम्नलिखित से अधिक है।
(A) ₹ 1,20,000
(C) ₹ 5,00,000
(B) ₹50,000
(D) ₹ 10,00,000
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44AA(2)(i) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का व्यवसाय से कुल कारोबार/सकल प्राप्तियाँ पिछले तीन वर्षों में से किसी भी वर्ष ₹1,20,000 से अधिक रही हैं, तो उसे खाताबही रखना अनिवार्य है।
इसलिए सही विकल्प है: (A) ₹1,20,000
- पेटेंट अधिनियम, 1970 के अंतर्गत, कौन-सी स्थिति किसी पेटेंट आवेदन को निर्धारित अवधि की समाप्ति के बाद भी प्रकाशित होने
से रोकती है ?
(A) जब आवेदक ने शीघ्र परीक्षण के लिए अनुरोध प्रस्तुत किया हो ।
(B) जब धारा 35 के अंतर्गत गोपनीयता निर्देश लागू किया गया हो ।
(C) जब नियंत्रक द्वारा पेटेंट पहले ही प्रदान कर दिया गया हो ।
(D) जब आवेदक ने समय विस्तार का अनुरोध किया हो
पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 35 के तहत, केंद्र सरकार द्वारा गोपनीयता निर्देश (secrecy direction) जारी किया जा सकता है यदि आविष्कार रक्षा या सुरक्षा हितों से जुड़ा है।
ऐसी स्थिति में, पेटेंट आवेदन निर्धारित अवधि की समाप्ति के बाद भी प्रकाशित नहीं किया जाता, जब तक कि गोपनीयता निर्देश हटाया न जाए।
इसलिए सही विकल्प है: (B) जब धारा 35 के अंतर्गत गोपनीयता निर्देश लागू किया गया हो।
- नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A)और दूसरे को कारण (R) कहा गया है।
अभिकथन (A) :किसी समाचार पत्र में हित रखने वाला कोई भी व्यक्ति, जिसे जब्त घोषित करदिया गया है, राजपत्र में प्रकाशन के दो महीने के भीतर उस घोषणा को रद्द करने के लिए उच्चन्यायालय में आवेदन कर सकता है ।
कारण (R) : ऐसे आवेदनों की सुनवाई के लिए उच्चन्यायालय की विशेष पीठ में हमेशा ठीक तीन न्यायाधीश होने चाहिए, चाहे
उस उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या कितनी भी हो ।
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत उपर्युक्त अभिकथन और कारण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौनसा सही है ?
(A) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(B) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(C) (A) सत्य है, लेकिन (R)असत्य है।
(D) (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 96 के अनुसार:
अभिकथन (A) सही है — समाचार पत्र में हित रखने वाला व्यक्ति, जब्ती की घोषणा के राजपत्र में प्रकाशन के दो महीने के भीतर उच्च न्यायालय में आवेदन कर सकता है।
कारण (R) असत्य है — धारा 96(2) कहती है कि ऐसे आवेदन की सुनवाई उच्च न्यायालय की विशेष पीठ द्वारा की जाएगी, जिसमें तीन या पाँच न्यायाधीश हो सकते हैं, न कि हमेशा ठीक तीन।
इसलिए सही विकल्प है: (C) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
- निम्नलिखित कथनों को पढ़ें और सही विकल्प चुनें।
कथन 1 :भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत, स्वीकृतियाँ सामान्यतः प्रासंगिक होती हैं और उन्हें देने वाले व्यक्ति के
विरुद्ध सिद्ध किया जा सकता है, लेकिन सामान्यतः उस व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से सिद्ध नहीं किया जा सकता।
कथन 2 : कोई स्वीकृति उसे देने वाले व्यक्ति की ओर से तब भी सिद्ध की जा सकती है यदि वह मन या शरीर की किसी ऐसी दशा
के अस्तित्व से संबंधित हो, जो उस समय या उसके लगभग की हो जब ऐसी दशा विद्यमान थी, और उसकी सत्यता दर्शाने वाले
आचरण द्वारा समर्थित हो ।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के अंतर्गत उपयुक्त कथनों के संदर्भ में,निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
(A) कथन 1 और 2 दोनों असत्य हैं
(B) केवल कथन 1 सत्य है
(C) केवल कथन 2 सत्य है
(D) दोनों कथन सत्य हैं
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (यहाँ 2023 संस्करण का उल्लेख है, लेकिन सिद्धांत समान हैं) के अनुसार:
कथन 1 सही है — धारा 17–21 के अनुसार, स्वीकृति उसे देने वाले व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य होती है, लेकिन सामान्यतः उसके पक्ष में नहीं, जब तक कि कोई अपवाद न लागू हो।
कथन 2 सही है — धारा 21 की व्याख्या के साथ-साथ धारा 14 व 8 के अनुसार, यदि स्वीकृति मन या शरीर की दशा से संबंधित है और उसकी सत्यता को दर्शाने वाले आचरण से समर्थित है, तो उसे उस व्यक्ति की ओर से सिद्ध किया जा सकता है।
इसलिए सही विकल्प है: (D) दोनों कथन सत्य हैं।
- आयकर अधिनियम, 1961की धारा 16 (ii)के अंतर्गतकिस प्रकार का भत्ता कटौती के लिए योग्य है ?
(A) निजी कंपनियों द्वारा दिया जाने वाला मकान किराया भत्ता
(B) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला मनोरंजन भत्ता
(C) सभी वेतनभोगी व्यक्तियों को दिया जाने वाला परिवहन भत्ता
(D) घरेलू यात्रा के लिए दिया जाने वाला अवकाश यात्रा भत्ता
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 16(ii) के अनुसार, मनोरंजन भत्ता (Entertainment Allowance) की कटौती केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही उपलब्ध है, न कि सभी वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए।
इसलिए सही विकल्प है: (B) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला मनोरंजन भत्ता।
- दिए गए कथनों को पढ़िए और सही विकल्प चुनिए।
कथन 1 : परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अंतर्गत, बिना प्रतिफल के निर्मित, आहरित, स्वीकृत या हस्तांतरित परक्राम्य
लिखत, लेन-देन के पक्षों के बीच भुगतान का कोई दायित्व उत्पन्न नहीं करता है।
कथन 2 : इसी अधिनियम के अनुसार, यदि वह प्रतिफल जिसके लिए परक्राम्य लिखत जारी किया गया था, आंशिक रूप से विफल
हो जाता है, तो निकटतम संबंध में धारक केवल वास्तव में प्राप्त प्रतिफल के अनुरूप आनुपातिक राशि ही वसूल करने का हकदार होता है।
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अंतर्गत उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा सही है ?
(A) कथन 1 और 2 दोनों असत्य हैं
(B) केवल कथन 1सत्य है
(C) केवल कथन 2 सत्य है
(D) दोनों कथन सत्य हैं
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अनुसार:
कथन 1 — धारा 43 के अनुसार, बिना प्रतिफल (consideration) के बना या हस्तांतरित परक्राम्य लिखत, पक्षों के बीच कोई दायित्व नहीं बनाता। → सत्य
कथन 2 — धारा 45 के अनुसार, यदि प्रतिफल आंशिक रूप से विफल हो जाता है, तो धारक केवल आनुपातिक राशि ही वसूल कर सकता है। → सत्य
इसलिए सही विकल्प है: (D) दोनों कथन सत्य हैं।
- निम्नलिखित प्रश्न में, एक कथन के बाद दो निष्कर्ष, I और IIदिए गए हैं।
कथन :
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत, जब किसी कंपनी द्वारा कोई अपराध किया जाता है, तो अपराध के समय कंपनी
का प्रत्यक्ष रूप से प्रभारी और उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति,साथ ही स्वयं कंपनी, दोषी मानी जाती है। हालाँकि, कोई व्यक्ति दायित्व से
बच सकता है यदि वह यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने इसे रोकने के लिए उचित
तत्परता बरती थी ।
निष्कर्ष:
I. अधिनियम के अंतर्गत पर्यावरणीय अपराधों के लिए कंपनी और उसके उत्तरदायी अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराया जा सकता ) है।
II. एक बार कंपनी के किसी अपराध के दोषी पाए जाने पर कंपनी का कोई अधिकारी दायित्व से कभी नहीं बच सकता।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत उपर्युक्त कथन और निष्कर्षों के संदर्भ में,निम्नलिखित में से कौन सा सही है ?
(A) केवल निष्कर्ष अनुसरण करता है
(B) केवल निष्कर्ष II अनुसरण करता है
(C) निष्कर्ष I और II दोनों अनुसरण करते हैं 18
(D) न तो निष्कर्ष I और न ही II अनुसरण करता है।
कथन में स्पष्ट कहा गया है:
कंपनी और उसके प्रभारी व्यक्ति दोनों उत्तरदायी हैं। → निष्कर्ष I सही है।
लेकिन व्यक्ति बच सकता है यदि वह साबित करे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ या उसने रोकने का उचित प्रयास किया। → निष्कर्ष II गलत है, क्योंकि वह बच सकता है।
इसलिए सही विकल्प है: (A) केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है।
- आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 24(a) के तहत, गृह संपत्ति से आय के वार्षिक मूल्य का कितना प्रतिशत मानक कटौती के
रूप में अनुमत है ?
(A) 20
(B) 40
(C) 30
(D) 50
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 24(a) के अनुसार, गृह संपत्ति से आय की गणना में वार्षिक मूल्य के 30% की मानक कटौती (मरम्मत, बीमा, अनुरक्षण आदि के लिए) दी जाती है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) 30
- भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत श्री मेहता की कृषि भूमि के अधिग्रहण हेतु सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद, उन्हें
पता चलता है कि उनकी फसलों से होने वाली आय लगातार कम होती जा रही है, जब तक कि अधिकारी अंततः भूमि पर कब्जा
नहीं कर लेते। वे लाभ में इस कमीके लिए मुआवजेकी माँग करते हुए अदालत जाते हैं । अधिनियम के अनुसार, ऐसे मामले में
किस प्रकार के नुकसान की भरपाई की जा सकती है ?
(A) बाज़ार में ज़मीन की गिरती कीमतों के कारण होने वाला नुकसान
(B) किरायेदारी समझौतों के रद्द होने के कारण होने वाला नुकसान
(C) आस-पास के इलाकों में रोज़गार का नुकसान
(D) अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण लाभ में वास्तविक कमी
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 23(1), सातवाँ प्रावधान के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद से लेकर अधिग्रहण के दिन तक भूमि के लाभ में वास्तविक कमी (actual diminution of profits) के लिए मुआवजा दिया जा सकता है।
इसलिए सही विकल्प है: (D) अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण लाभ में वास्तविक कमी
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 35A के अनुसार,सामान्य मामलों में न्यायालय प्रतिकारात्मक खर्चे के रूप में अधिकतम
कितनी राशि दिला सकता है ?
(A) 2,000
(C) ₹ 5,000
(B) ₹ 10,000
(D) ₹ 3,000
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 35A के अनुसार, न्यायालय प्रतिकारात्मक खर्चे (Compensatory Costs) के रूप में सामान्य मामलों में अधिकतम ₹3,000 तक की राशि दे सकता है।
इसलिए सही विकल्प है: (D) ₹3,000
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुसार, प्रस्तावक के विरुद्ध स्वीकृति का संप्रेषण कब पूर्ण होता है ?
(A) जब स्वीकृतिकर्ता स्वीकृति पत्र तैयार करता है
(B) जब इसे स्वीकृतिकर्ता के नियंत्रण से बाहर भेज दिया जाता है
(C) जब इसे प्रस्तावक पक्ष के कार्यालय में पहुँचा दिया जाता है
(D) जब प्रस्तावक अपने अभिलेखों में प्राप्तिकी स्वीकृति देता है
भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 4 के अनुसार, प्रस्तावक के विरुद्ध स्वीकृति का संप्रेषण तब पूर्ण होता है जब इसे प्रस्तावक के लिए ऐसे रास्ते में डाल दिया जाता है जिससे वह उसे प्राप्त कर सके।
यानी जब स्वीकृति स्वीकृतिकर्ता के नियंत्रण से बाहर भेज दी जाती है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) जब इसे स्वीकृतिकर्ता के नियंत्रण से बाहर भेज दिया जाता है।
- राहुल अपना खुद का व्यापार चलाने के लिए शहर में एक दुकान किराए पर लेता है । बाद में, मकान मालिक पट्टा समाप्त करने का
निर्णय लेता है। क्योंकि पट्टा कृषि या विनिर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए है और पक्षों के बीच कोई विशेष अनुबंध नहीं है,
इसलिए मकान मालिक यह नहीं समझ पा रहा है कि संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882के तहत पट्टा समाप्त करने के लिए उसे कानूनी
तौर परकितने दिनों का नोटिस देना होगा। आवश्यक नोटिस अवधि क्या है ?
(A) पाँच दिन का नोटिस
(B) पंद्रह दिन का नोटिस
(C) पैंतालीस दिन का नोटिस
(D) साठ दिन का नोटिस
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 106 के अनुसार:
यदि पट्टा कृषि या विनिर्माण के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए है, और पक्षों के बीच कोई विशेष अनुबंध नहीं है, तो पट्टा समाप्त करने के लिए 15 दिन का नोटिस देना आवश्यक है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) पंद्रह दिन का नोटिस।
- परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अनुसार, धारा 143 के अंतर्गत संक्षिप्त विचारण में मजिस्ट्रेट द्वारा दी जाने वाली अधिकतम
कारावास की सजा क्या है?
(A) छह महीने का कारावास
(B) दो वर्ष का कारावास
(C) एक वर्ष का कारावास
(D) तीन वर्ष का कारावास
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143 के अनुसार, संक्षिप्त विचारण (summary trial) में मजिस्ट्रेट द्वारा दी जा सकने वाली अधिकतम कारावास की सजा एक वर्ष है।
इसलिए सही विकल्प है: (C) एक वर्ष का कारावास
- अगर इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 57 के तहत उम्रकैद की सज़ा पाए किसी दोषी की सज़ा माफ करने पर विचार किया जा रहा है, तो कोर्ट को कितने साल की बराबर सज़ा देनी चाहिए?
(A) दस साल की जेल
(B) बीस साल की जेल
(C) चालीस साल की जेल
(D) पचास साल की जेल
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 57 के अनुसार, आजीवन कारावास की सजा की गणना के लिए बीस वर्ष के समतुल्य माना जाता है।
इसलिए सही विकल्प है: (B) बीस साल की जेल
- पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के अनुसार, किन हालात में किसी एम्प्लॉई के लिए अपने एम्प्लॉयर से ग्रेच्युटी पेमेंट के लिए लगातार पाँच साल की सर्विस पूरी करना ज़रूरी नहीं है?
(A) एम्प्लॉई का अपनी मर्ज़ी से पद से इस्तीफ़ा देना।
(B) काम पर गलत काम की वजह से एम्प्लॉई को नौकरी से निकालना।
(C) एक्सीडेंट या बीमारी की वजह से एम्प्लॉई की मौत या विकलांगता।
(D) उसी ऑर्गनाइज़ेशन में किसी एम्प्लॉई का दूसरे डिपार्टमेंट में ट्रांसफर।
उपदान संदाय (ग्रेच्युटी भुगतान) अधिनियम, 1972 की धारा 4(1) के अनुसार, पाँच वर्ष की निरंतर सेवा की शर्त मृत्यु या विकलांगता के मामले में लागू नहीं होती।
इसलिए सही विकल्प है: (C) एक्सीडेंट या बीमारी की वजह से एम्प्लॉई की मौत या विकलांगता।
निष्कर्ष
AIBE 20 QUESTION PAPER 2025: ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE 20) 2025 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 30 नवंबर, 2025 को देश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक आयोजित किया । आज यह परीक्षा सम्पन्न होते ही सभी उमीदवार सोच र होंगे की वो पास हो पाएंगे की नहीं, तो इस लिए यहां हम AIBE 20 (AIBE XX) Question Paper Solution 2025 का पेपर सोल्यूशं दे रहे हैं। एक ही शिफ्ट में दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक इस परीक्षा को आयोजित किया गया था।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया उन लॉ ग्रेजुएट्स के लिए AIBE आयोजित करता है जो भारत में वकील के तौर पर काम करने के लिए अपना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस लेना चाहते हैं। CoP पाने और भारतीय अदालतों में वकालत शुरू करने के लिए यह एग्जाम सनद प्राप्त कारण के बाद दो साल में पास करना ज़रूरी है।
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BCI ने बताया की ऐन्सर की बहुत जल्द ही प्रसिद्ध की जाएगी , इसके लिए बी सीआई की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहना चाहिए
बी सी आई के मुताबिक फाइनल ऐन्सर की प्रसिद्ध होने के बाद ही रिजल्ट निकलेगा । उस से पहले आप को कोई समस्या हो तो उस के लिए समय दिया जाएगा
आधिकारिक ऐन्सर की केवल बी सी आई की वेबसाइट से ही डाउनलोड की जा सकती है ।
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